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Friday, October 5, 2018

वाचन प्रेरणा दिन शायरी / चारोळी/कविता , Dr.A.P.j.Abdul Kalam whatsapp msgs

वाचन प्रेरणा दिन शायरी / चारोळी Dr.A.P.j.Abdul Kalam whatsapp msgs 


_*APJ Abdul Kalams's Messages to Start your day Beautifully -*



*1. जिदंगी मे कभी भी किसी को*
      *बेकार मत समझना,क्योक़ि*
        *बंद पडी घडी भी दिन में*
          *दो बार सही समय बताती है।*

*2. किसी की बुराई तलाश करने*
     *वाले इंसान की मिसाल उस*
       *मक्खी की तरह है जो सारे*
        *खूबसूरत जिस्म को छोडकर*
          *केवल जख्म पर ही बैठती है।*

*3. टूट जाता है गरीबी मे*
      *वो रिश्ता जो खास होता है,*
        *हजारो यार बनते है*
          *जब पैसा पास होता है।*

*4. मुस्करा कर देखो तो*
      *सारा जहाॅ रंगीन है,*
       *वर्ना भीगी पलको*
          *से तो आईना भी*
             *धुधंला नजर आता है।*

*5..जल्द मिलने वाली चीजे*
      *ज्यादा दिन तक नही चलती,*
        *और जो चीजे ज्यादा*
           *दिन तक चलती है*
            *वो जल्दी नही मिलती।*

*6. बुरे दिनो का एक*
      *अच्छा फायदा*
         *अच्छे-अच्छे दोस्त*
            *परखे जाते है ।*

*7. बीमारी खरगोश की तरह*
      *आती है और कछुए की तरह*
        *जाती है;*
          *जबकि पैसा कछुए की तरह*
             *आता है और.खरगोश की*
             *तरह जाता है ।*

*8. छोटी छोटी बातो मे*
      *आनंद खोजना चाहिए*
        *क्योकि बङी बङी तो*
          *जीवन मे कुछ ही होती है।*

*9. ईश्वर से कुछ मांगने पर*
      *न मिले तो उससे नाराज*
       *ना होना क्योकि ईश्वर*
           *वह नही देता जो आपको*
            *अच्छा लगता है बल्कि*
            *वह देता है जो आपके लिए*
                    *अच्छा होता है*

*10. लगातार हो रही*
        *असफलताओ से निराश*
           *नही होना चाहिए क्योक़ि*
           *कभी-कभी गुच्छे की आखिरी*
           *चाबी भी ताला खोल देती है।*

⧭ वाचन प्रेरणा दिन सूत्रसंचालन - आशिष देशपांडे सरांचे



⧭ वाचन प्रेरणा दिन शायरी / चारोळी/कविता , DR.A.P.J.ABDUL KALAM WHATSAPP MSG


*11. ये सोच है हम इसांनो की*
        *कि एक अकेला*
          *क्या कर सकता है*
             *पर देख जरा उस सूरज को*
           *वो अकेला ही तो चमकता है।*

*12. रिश्ते चाहे कितने ही बुरे हो*
        *उन्हे तोङना मत क्योकि*
          *पानी चाहे कितना भी गंदा हो*
           *अगर प्यास नही बुझा सकता*
             *वो आग तो बुझा सकता है।*

*13. अब वफा की उम्मीद भी*
        *किस से करे भला*
            *मिटटी के बने लोग*
               *कागजो मे बिक जाते है।*

*14. इंसान की तरह बोलना*
         *न आये तो जानवर की तरह*
             *मौन रहना अच्छा है।*

*15. जब हम बोलना*
         *नही जानते थे तो*
           *हमारे बोले बिना'माँ*'
     *हमारी बातो को समझ जाती थी।*
            *और आज हम हर बात पर*
                 *कहते है छोङो भी 'माँ'*
                  *आप नही समझोंगी।*

*16. शुक्र गुजार हूँ*
        *उन तमाम लोगो का*
           *जिन्होने बुरे वक्त मे*
             *मेरा साथ छोङ दिया*
                 *क्योकि उन्हे भरोसा था*
                   *कि मै मुसीबतो से*
              *अकेले ही निपट सकता हूँ।*

*17. शर्म की अमीरी से*
         *इज्जत की गरीबी अच्छी है।*

*18. जिदंगी मे उतार चङाव*
         *का आना बहुत जरुरी है*
          *क्योकि ECG मे सीधी लाईन*
            *का मतलब मौत ही होता है।*

*19. रिश्ते आजकल रोटी*
        *की तरह हो गए है*
            *जरा सी आंच तेज क्या हुई*
            *जल भुनकर खाक हो जाते।*

*20. जिदंगी मे अच्छे लोगो की*
        *तलाश मत करो*
          *खुद अच्छे बन जाओ*
            *आपसे मिलकर शायद*
               *किसी की तालाश पूरी हो।*


ए.पी.जी अब्दुल कलाम पर देशभक्ति कविता  ।



भारत माता की शान हूँ मैं, ए पी जे अब्दुल कलाम हूँ मैं
जो वन्देमातरम कहकर, गर्व से फूल जाए वो मुसलमान हूँ मैं
मैंने देखा था अजब नजारा, जब मैं मौत की नींद में सोया था…..
तब हिंदु या मुसलमान नहीं, पूरा हिन्दुस्तान रोया था……………..
जो कर सकता था, वो सब कुछ किया मैंने अपने देश के लिए
अपने जीवन का एक-एक पल जीया अपने देश के लिए
अब मेरे हिन्दुस्तान को संवारो और सम्भालो तुम…….
देश के दुश्मनों से मेरे देश को बचा लो तुम……………….

मेरे भारत को फिर विश्व गुरु बनाना है तुम्हें
भारत को फिर दुनिया का सिरमौर बनाना है तुम्हें
जो सपने मैंने अपने भारत के लिए देखे हैं………….
उन सपनों को सच कर दिखाना है तुम्हें………………
याद रखो, जो देशभक्त हो वही हिंदु या मुसलमान होता है
जो गद्दार हो, वो तो बस गद्दार होता है… इस धरती पर भार होता है
हर गली-मुहल्ले में देशभक्ति की अलख जगा दो तुम…..
हर देशभक्त को अब्दुल कलाम बना दो तुम…………


डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम पर कविता - 2


चला गया वो आधुनिक;भगवान हमारा।
धरती सूनी हुई है;जग सूना हुआ हमारा।।

चले गए भगवान वो;तो जहाँ सारा रोया है।
देखो यारो मेरे देश ने;कलाम को खोया है।।

देश का सच्चा सपूत;था यारों वही।
भेदभाव से परे;नेक बंदा था वही।।

देता हरदम था जो एकता का पैगाम।
हुई थी जिनसे दुश्मनों की नींद हराम।।

दिया है जिसने देश को परमाणु;वो कलाम है।
उस मिसाइल मैन को यारों;शत्-शत् सलाम है।।


एपीजे अब्दुल कलाम कविता


बोलते-बोलते अचानक धड़ाम से
जमीन पर गिरा एक फिर वटवृक्ष
फिर कभी नही उठने की लिए
वृक्ष जो रत्न था,
वृक्ष जो शक्ति पुंज था,
वृक्ष जो न बोले तो भी
खिलखिलाहट बिखेरता था
चीर देता था हर सन्नाटे का सीना
सियासत से कोसों दूर
अन्वेषण के अनंत नशे में चूर
वृक्ष अब नही उठेगा कभी
अंकुरित होंगे उसके सपने
फिर इसी जमीन से
उगलेंगे मिसाइलें
शन्ति के दुश्मनों को
सबक सीखने के लिए
वृक्ष कभी मरते नही
अंकुरित होते हैं
नये-नये पल्लवों के साथ
वे किसी के अब्दुल होते है
किसी के कलाम.


#2 APJ Abdul Kalam Poem | एपीजे अब्दुल कलाम कविता



हमारा सलाम, कलाम के नाम

आइये, एक महान आत्मा को सलाम करे,
एक ऐसी आत्मा, जिन्होंने अपना जीवन,
बलिदान कर दिया – हमारे लिए.
आइये, श्रद्धांजलि दे एक ऐसी आत्मा को,
जिन्होंने असम्भव को संभव किया हमारे लिए.
आइये , एक महान आत्मा श्रद्धांजलि दे ,
जिसने अपने देश के लिए एक सपना देखा.
आइये, हम अपने भूतपूर्व राष्ट्रपति को नमन करें,
जिन्होंने हर विद्यार्थी को प्रोत्साहित किया,
जिनके किताबों और भाषण ने हमें प्रेरणा दी.
आइये, एक ऐसे व्यक्ति को सलाम करे,
जो किसी भी धर्म के बीच अंतर नही करते.
एक ऐसे व्यक्ति को सलाम करे,
जो सबके दिल पर राज करते हैं .

डॉ. अब्दुल कलम जी, हम आपको हमेशा याद रखेंगे. हम आपसे वादा करते है कि हम आपके सपनों को साकार करेंगे.
– हर्षिता


#3 APJ Abdul Kalam Poem | एपीजे अब्दुल कलाम कविता


देश का सच्चा सपूत था वो
जात-पात से परे नेक बन्दा था वो
फ़कीराना जिन्दगी जीकर जिसने
देश को ताकतवर बनाया
सबसे चाहिता राष्ट्रपति कहलाकर
दिलों में अपनी जगह बनाया
नम आँखों को छोड़ वो
अनगिनत यादों में बस गया
मिसाइल मेन कहलाने वाल
अलविदा दोस्तों कह गया.
– Karanika Pathak


अब्दुल कलाम जी पर कविता ( APJ Abdul Kalam Hindi Poem Kavita)


देश का सच्चा सपूत था वो

जात पात से परे नेक बन्दा था वो

युवाओं का था सच्चा साथी

फ़कीराना जिंदगी जीकर जिसने

देश को ताकतवर बनाया

सबसे चाहिता राष्ट्रपति कहलाकर

लाखों दिलों में अपनी जगह बनाया

अब यादों में बस गया वो 

नम आँखों को छोड़ कर वो 

अनगिनत यादों में बस गया 

मिसाइल मेन कहलाने वाला


अलविदा दोस्तों कह गया 



⧭ वाचन प्रेरणा दिन शायरी / चारोळी/कविता , DR.A.P.J.ABDUL KALAM WHATSAPP MSG


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